भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी एच.एस. प्रणय ने साफ शब्दों में कहा है कि वे अभी खेल से दूर होने या पीछे हटने के बारे में नहीं सोच रहे हैं। हाल के एक बातचीत में उन्होंने कहा, “मैं अभी मशाल छोड़ने के लिए तैयार नहीं हूं।” उनके इस बयान ने यह संकेत दिया है कि चोटों और उतार-चढ़ाव के बावजूद वे आने वाले वर्षों में भी प्रतिस्पर्धी बैडमिंटन खेलना चाहते हैं।
प्रणय पिछले कुछ वर्षों में भारतीय पुरुष बैडमिंटन के सबसे भरोसेमंद खिलाड़ियों में शामिल रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उन्होंने कई मजबूत खिलाड़ियों को हराकर भारत को महत्वपूर्ण जीत दिलाई है। विशेष रूप से टीम प्रतियोगिताओं में उनका प्रदर्शन अक्सर निर्णायक साबित हुआ है। यही कारण है कि भारतीय बैडमिंटन में उन्हें अनुभव और संघर्षशीलता के प्रतीक के रूप में देखा जाता है।
हालांकि उनका सफर आसान नहीं रहा। घुटने और फिटनेस से जुड़ी समस्याओं ने कई बार उनकी तैयारियों को प्रभावित किया। लंबे समय तक दर्द के साथ खेलना पड़ा और कुछ टूर्नामेंटों में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर सके। लेकिन प्रणय का कहना है कि इन कठिन परिस्थितियों ने उन्हें मानसिक रूप से और मजबूत बनाया है।
उन्होंने कहा कि शीर्ष स्तर पर बने रहने के लिए केवल प्रतिभा काफी नहीं होती, बल्कि निरंतर मेहनत, अनुशासन और धैर्य भी जरूरी है। उनके अनुसार हर खिलाड़ी के करियर में ऐसा समय आता है जब उसे खुद से सवाल पूछने पड़ते हैं, लेकिन उन्होंने हमेशा वापसी की राह चुनी है।

भारतीय बैडमिंटन में नई पीढ़ी तेजी से आगे बढ़ रही है। ऐसे में प्रणय से अक्सर पूछा जाता है कि क्या वे युवा खिलाड़ियों को जगह देने के लिए धीरे-धीरे पीछे हटेंगे। इस पर उन्होंने कहा कि युवा खिलाड़ियों का उभरना भारतीय बैडमिंटन के लिए अच्छी बात है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि अनुभवी खिलाड़ी तुरंत खेल छोड़ दें। उनका मानना है कि अनुभव और युवा ऊर्जा दोनों मिलकर ही मजबूत टीम बनाते हैं।
प्रणय ने यह भी कहा कि वे अभी अपने खेल में सुधार की गुंजाइश देखते हैं। फिटनेस, रिकवरी और मैच रणनीति पर विशेष ध्यान देकर वे आने वाले बड़े टूर्नामेंटों में बेहतर प्रदर्शन करना चाहते हैं। उनका लक्ष्य केवल भाग लेना नहीं, बल्कि प्रतिस्पर्धी बने रहना और महत्वपूर्ण मुकाबले जीतना है।
बैडमिंटन विशेषज्ञों का मानना है कि प्रणय की सबसे बड़ी ताकत उनकी मानसिक दृढ़ता है। कठिन मैचों में शांत रहना और दबाव की स्थिति में अंक निकालना उन्हें खास बनाता है। यही गुण उन्हें लंबे समय तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर टिकाए रखने में मदद करते रहे हैं।
प्रशंसकों ने भी उनके बयान का स्वागत किया है। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने लिखा कि भारतीय बैडमिंटन को अभी भी प्रणय जैसे अनुभवी खिलाड़ी की जरूरत है। कुछ प्रशंसकों ने उनके संघर्ष और वापसी की कहानियों को प्रेरणादायक बताया।
प्रणय ने यह भी स्वीकार किया कि उम्र बढ़ने के साथ रिकवरी में अधिक समय लगता है, इसलिए प्रशिक्षण और आराम के बीच संतुलन बनाना पहले से ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है। उन्होंने कहा कि अब वे अपने शरीर को बेहतर समझते हैं और उसी के अनुसार तैयारी करते हैं।
भारतीय बैडमिंटन संघ के लिए भी अनुभवी खिलाड़ियों की मौजूदगी महत्वपूर्ण मानी जाती है। बड़े टूर्नामेंटों में युवा खिलाड़ियों को मार्गदर्शन और टीम वातावरण में स्थिरता देने में वरिष्ठ खिलाड़ियों की भूमिका अहम होती है। प्रणय का अनुभव भविष्य की टीमों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है।
फिलहाल प्रणय का संदेश स्पष्ट है—वे अभी समाप्त नहीं हुए हैं। वे प्रतिस्पर्धा जारी रखना चाहते हैं, देश के लिए जीत हासिल करना चाहते हैं और तब तक खेलना चाहते हैं जब तक उन्हें लगे कि वे शीर्ष स्तर पर योगदान दे सकते हैं। उनका यह बयान भारतीय खेल जगत में एक मजबूत संदेश की तरह देखा जा रहा है कि जुनून, मेहनत और विश्वास उम्र से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण होते हैं।