स्वतंत्रता दिवस समारोह में लाल किले पर गूंजेगा ‘वंदे मातरम्’, तैयारियां अंतिम चरण में

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इस वर्ष स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान लाल किले से एक बार फिर ‘वंदे मातरम्’ की गूंज सुनाई देगी। केंद्र सरकार ने घोषणा की है कि 15 अगस्त के मुख्य समारोह में राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ का सामूहिक गायन किया जाएगा। इसके लिए विशेष तैयारियां की जा रही हैं और विभिन्न सांस्कृतिक दलों तथा कलाकारों को अभ्यास कराया जा रहा है।

लाल किला हर वर्ष स्वतंत्रता दिवस समारोह का केंद्र होता है। प्रधानमंत्री यहां राष्ट्रीय ध्वज फहराते हैं और देश को संबोधित करते हैं। इस बार समारोह में सांस्कृतिक कार्यक्रमों को विशेष रूप से भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत से जोड़ने पर जोर दिया गया है। अधिकारियों के अनुसार ‘वंदे मातरम्’ का सामूहिक प्रस्तुतीकरण उसी श्रृंखला का हिस्सा है।

राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का एक महत्वपूर्ण प्रतीक रहा है। इसे बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने अपने उपन्यास आनंदमठ में लिखा था। आजादी की लड़ाई के दौरान यह गीत देशभक्ति और स्वाधीनता की भावना जगाने का माध्यम बना। अनेक आंदोलनों, सभाओं और जुलूसों में इसे गाया जाता था और स्वतंत्रता सेनानियों ने इसे राष्ट्रीय चेतना का स्वर माना।

सरकारी अधिकारियों का कहना है कि इस वर्ष समारोह का उद्देश्य स्वतंत्रता आंदोलन की स्मृतियों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है। इसी कारण कार्यक्रम में उन प्रतीकों और गीतों को प्रमुखता दी जा रही है जिन्होंने आजादी की लड़ाई के दौरान लोगों को एकजुट किया था। ‘वंदे मातरम्’ का गायन उसी ऐतिहासिक विरासत की याद दिलाएगा।

तैयारियों के तहत राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में कई सांस्कृतिक अभ्यास सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। स्कूलों, कॉलेजों, संगीत संस्थानों और सांस्कृतिक संगठनों के चयनित प्रतिभागी सामूहिक प्रस्तुति में भाग लेंगे। सुरक्षा कारणों से लाल किले के आसपास प्रवेश और आवाजाही की व्यवस्था भी चरणबद्ध तरीके से तय की जा रही है।

इतिहासकारों का कहना है कि ‘वंदे मातरम्’ केवल एक गीत नहीं, बल्कि औपनिवेशिक शासन के खिलाफ भारतीय समाज की भावनाओं का प्रतिनिधित्व करता है। स्वतंत्रता आंदोलन के अनेक नेताओं ने इसे राष्ट्रीय जागरण का स्वर बताया था। हालांकि समय-समय पर इसके कुछ हिस्सों को लेकर राजनीतिक और वैचारिक बहस भी होती रही है, लेकिन इसके ऐतिहासिक महत्व को व्यापक रूप से स्वीकार किया जाता है।

राजधानी में स्वतंत्रता दिवस की तैयारियां तेजी से चल रही हैं। लाल किले के परिसर को विशेष रोशनी और सजावट से संवारा जा रहा है। विभिन्न राज्यों की झांकियां, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और सैन्य बैंड कार्यक्रम की शोभा बढ़ाएंगे। अधिकारियों का कहना है कि इस वर्ष समारोह में युवाओं और छात्रों की भागीदारी बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया गया है।

सांस्कृतिक विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्रीय पर्वों पर सामूहिक गायन नागरिकों में साझा पहचान और सहभागिता की भावना मजबूत करता है। उनका कहना है कि जब हजारों लोग एक साथ देशभक्ति गीत गाते हैं तो समारोह केवल औपचारिक कार्यक्रम नहीं रहता, बल्कि भावनात्मक अनुभव बन जाता है।

स्वतंत्रता दिवस समारोह का सीधा प्रसारण देशभर में किया जाएगा। लाखों लोग टीवी और डिजिटल माध्यमों से लाल किले के कार्यक्रम को देखेंगे। ऐसे में ‘वंदे मातरम्’ का सामूहिक गायन इस वर्ष के समारोह का एक विशेष आकर्षण माना जा रहा है।

सरकार ने नागरिकों से भी अपील की है कि वे स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय ध्वज का सम्मान करें और अपने-अपने क्षेत्रों में आयोजित कार्यक्रमों में भाग लें। स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों में भी देशभक्ति गीतों और स्वतंत्रता सेनानियों पर आधारित कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

फिलहाल लाल किले पर तैयारियां अंतिम चरण में हैं और देश 15 अगस्त के उस क्षण का इंतजार कर रहा है जब राष्ट्रीय ध्वज के साथ ‘वंदे मातरम्’ की स्वर लहरियां ऐतिहासिक प्राचीरों से गूंजेंगी। यह प्रस्तुति स्वतंत्रता संग्राम की स्मृतियों को श्रद्धांजलि देने और राष्ट्रीय एकता की भावना को मजबूत करने का प्रतीक मानी जा रही है।

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