दक्षिण अमेरिकी देश कोलंबिया में आए भीषण भूकंप ने भारी तबाही मचा दी है। अब तक 132 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 570 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। कई लोग अब भी मलबे में फंसे होने की आशंका है और राहत तथा बचाव अभियान लगातार जारी है। इस त्रासदी के बाद पूरे देश में शोक का माहौल है और सरकार ने प्रभावित इलाकों में आपातकालीन सहायता बढ़ा दी है।
भूकंप देर रात महसूस किया गया और इसकी तीव्रता इतनी अधिक थी कि राजधानी बोगोटा सहित कई शहरों में इमारतें हिल गईं। लोग घबराकर घरों से बाहर निकल आए। सबसे ज्यादा नुकसान मध्य और पश्चिमी कोलंबिया के उन इलाकों में हुआ जहां पुराने मकान और कमजोर संरचनाएं बड़ी संख्या में मौजूद हैं। कई बहुमंजिला इमारतों में दरारें आ गईं, कुछ इमारतें पूरी तरह ढह गईं और सड़कों पर मलबा फैल गया।
स्थानीय प्रशासन के अनुसार राहत दलों ने रातभर अभियान चलाया। सेना, पुलिस, दमकल विभाग और मेडिकल टीमों को प्रभावित क्षेत्रों में तैनात किया गया है। भारी मशीनों की मदद से मलबा हटाया जा रहा है ताकि अंदर फंसे लोगों तक पहुंचा जा सके। कई जगहों पर बचावकर्मी हाथों से भी मलबा हटाते नजर आए, क्योंकि आशंका है कि मलबे के नीचे जीवित लोग दबे हो सकते हैं।
अस्पतालों में घायलों की संख्या लगातार बढ़ रही है। कई अस्पतालों में अतिरिक्त बिस्तरों की व्यवस्था करनी पड़ी है और डॉक्टरों की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं। गंभीर रूप से घायल लोगों को हेलीकॉप्टर के जरिए बड़े शहरों के अस्पतालों में पहुंचाया जा रहा है। रक्तदान शिविर भी लगाए गए हैं ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत रक्त उपलब्ध कराया जा सके।

भूकंप के बाद कई बार झटके महसूस किए गए, जिससे लोगों में डर बना हुआ है। प्रशासन ने लोगों से क्षतिग्रस्त इमारतों में वापस न जाने की अपील की है। कई परिवार खुले मैदानों, स्कूलों और अस्थायी राहत शिविरों में रात बिताने को मजबूर हैं। बारिश और ठंडे मौसम ने राहत कार्यों को और कठिन बना दिया है।
कोलंबिया के राष्ट्रपति ने प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण किया और मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि सरकार हर संभव सहायता उपलब्ध कराएगी और राहत कार्यों में किसी तरह की कमी नहीं आने दी जाएगी। राष्ट्रपति ने राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन एजेंसी को चौबीसों घंटे काम करने के निर्देश दिए हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह हाल के वर्षों में कोलंबिया में आया सबसे शक्तिशाली भूकंपों में से एक है। देश एंडीज पर्वत क्षेत्र में स्थित है और यहां भूकंपीय गतिविधियां समय-समय पर होती रहती हैं, लेकिन इस बार झटकों की तीव्रता और व्यापक असर ने चिंता बढ़ा दी है। वैज्ञानिक प्रभावित क्षेत्रों का सर्वेक्षण कर रहे हैं ताकि आगे के खतरे का आकलन किया जा सके।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने भी कोलंबिया की मदद की पेशकश की है। पड़ोसी देशों और कई अंतरराष्ट्रीय राहत संगठनों ने बचाव उपकरण, दवाएं और विशेषज्ञ टीम भेजने की तैयारी जताई है। संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियां भी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
प्रभावित लोगों की सबसे बड़ी चिंता अपने परिजनों की तलाश है। कई लोग अस्पतालों, राहत शिविरों और प्रशासनिक केंद्रों के चक्कर लगा रहे हैं। सोशल मीडिया पर लापता लोगों की तस्वीरें और जानकारी साझा की जा रही है। राहत शिविरों में भोजन, पानी और दवाओं की व्यवस्था की जा रही है, लेकिन कई दूरदराज इलाकों तक सहायता पहुंचाने में अभी भी दिक्कत आ रही है।
फिलहाल कोलंबिया की प्राथमिकता मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालना और घायलों का इलाज करना है। बचाव दलों का कहना है कि अगले 48 घंटे बेहद महत्वपूर्ण हैं। जैसे-जैसे मलबा हटाया जा रहा है, मृतकों और घायलों की संख्या बढ़ने की आशंका भी बनी हुई है। पूरा देश उम्मीद लगाए बैठा है कि राहतकर्मी अधिक से अधिक लोगों को जीवित बचाने में सफल होंगे।