असम में लगातार हो रही भारी बारिश और नदियों के उफान के कारण बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। राज्य के कई जिलों में जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, बाढ़ और इससे जुड़ी घटनाओं में मरने वालों की संख्या बढ़कर 68 हो गई है, जबकि 5.24 लाख से अधिक लोग अब भी इस प्राकृतिक आपदा की चपेट में हैं। राज्य सरकार, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) और स्थानीय प्रशासन राहत एवं बचाव कार्यों में लगातार जुटे हुए हैं।
ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियों का जलस्तर कई स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रहा है। लगातार बारिश के कारण निचले इलाकों में पानी भर गया है, जिससे हजारों परिवारों को अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा है। प्रशासन ने प्रभावित लोगों के लिए राहत शिविर और राहत वितरण केंद्र स्थापित किए हैं, जहां भोजन, पीने का पानी, दवाइयां और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
बाढ़ का सबसे अधिक असर ग्रामीण क्षेत्रों पर देखने को मिल रहा है। कई गांवों का संपर्क मुख्य सड़कों से कट गया है, जिससे राहत सामग्री पहुंचाने में कठिनाई हो रही है। नावों और अन्य जल परिवहन साधनों की मदद से लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा रहा है। प्रशासन लगातार संवेदनशील इलाकों की निगरानी कर रहा है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त बचाव दल भी तैनात किए जा रहे हैं।
बाढ़ के कारण कृषि क्षेत्र को भी भारी नुकसान पहुंचा है। हजारों हेक्टेयर में खड़ी फसलें पानी में डूब गई हैं, जिससे किसानों को बड़े आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा पशुधन पर भी बाढ़ का असर पड़ा है। कई स्थानों पर मवेशियों की मौत की खबरें सामने आई हैं, जबकि बड़ी संख्या में पशुओं को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।
राज्य के कई राष्ट्रीय उद्यान और वन्यजीव अभयारण्य भी बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। जलभराव के कारण जंगली जानवर ऊंचे इलाकों की ओर पलायन कर रहे हैं। वन विभाग लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं।

स्वास्थ्य विभाग ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में जलजनित और संक्रामक बीमारियों की आशंका को देखते हुए विशेष मेडिकल टीमें तैनात की हैं। राहत शिविरों में स्वास्थ्य जांच, दवाइयों का वितरण और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रशासन लोगों से बाढ़ के पानी में जाने से बचने और केवल सुरक्षित पेयजल का उपयोग करने की अपील कर रहा है।
मौसम विभाग ने राज्य के कुछ हिस्सों में अगले कुछ दिनों तक बारिश जारी रहने की संभावना जताई है। ऐसे में प्रशासन ने निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और आवश्यक होने पर सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है। जिला प्रशासन लगातार नदी के जलस्तर और मौसम की स्थिति पर नजर रख रहा है ताकि किसी भी आपात स्थिति से समय रहते निपटा जा सके।
राज्य सरकार ने प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहायता देने का भरोसा दिलाया है। राहत शिविरों में भोजन, चिकित्सा सुविधा, बच्चों और महिलाओं के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं तथा पशुओं के लिए चारा उपलब्ध कराने के प्रयास जारी हैं। इसके अलावा क्षतिग्रस्त सड़कों, पुलों और अन्य सार्वजनिक बुनियादी ढांचे का आकलन भी किया जा रहा है, ताकि पानी उतरने के बाद पुनर्निर्माण कार्य तेजी से शुरू किया जा सके।
असम में हर वर्ष मानसून के दौरान बाढ़ एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आती है, लेकिन इस बार लगातार बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। प्रशासन, राहत एजेंसियां और स्थानीय स्वयंसेवी संगठन मिलकर प्रभावित लोगों तक सहायता पहुंचाने में जुटे हैं। फिलहाल राज्य के लाखों लोगों की निगाहें मौसम में सुधार और जलस्तर घटने पर टिकी हैं, ताकि सामान्य जनजीवन जल्द से जल्द पटरी पर लौट सके।