सोहराबुद्दीन मामले में फिर खुला कानूनी अध्याय, पुलिसकर्मियों की बरी होने की चुनौती अब सुप्रीम कोर्ट में

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सोहराबुद्दीन शेख कथित फर्जी मुठभेड़ मामले में लंबे समय बाद एक बार फिर कानूनी हलचल तेज हो गई है। मामले में बरी किए गए 21 पुलिसकर्मियों के खिलाफ सोहराबुद्दीन के भाई ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। याचिका में निचली अदालत के उस फैसले को चुनौती दी गई है, जिसमें सभी 21 आरोपियों को बरी कर दिया गया था। इस कदम के बाद एक बार फिर यह पुराना और चर्चित मामला देश की शीर्ष अदालत के सामने पहुंच गया है।

यह मामला करीब दो दशक पुराना है और इसकी जांच तथा सुनवाई के दौरान कई महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आए थे। सोहराबुद्दीन शेख की 2005 में गुजरात में एक कथित पुलिस मुठभेड़ में मौत हुई थी। बाद में उनकी पत्नी कौसर बी और मामले से जुड़े एक अन्य व्यक्ति तुलसीराम प्रजापति की मौत ने भी इस पूरे प्रकरण को गंभीर सवालों के घेरे में ला दिया था।

क्या था पूरा मामला?

सोहराबुद्दीन शेख की मौत के बाद आरोप लगाया गया था कि यह वास्तविक मुठभेड़ नहीं, बल्कि एक फर्जी एनकाउंटर था। मामले की जांच आगे बढ़ने पर कई पुलिस अधिकारियों के नाम सामने आए और इस मामले को गुजरात से बाहर महाराष्ट्र में स्थानांतरित कर दिया गया।

जांच एजेंसियों ने पुलिस अधिकारियों के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए थे। हालांकि, लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद दिसंबर 2018 में मुंबई की विशेष सीबीआई अदालत ने 22 आरोपियों को बरी कर दिया था। इनमें से एक आरोपी की सुनवाई के दौरान मौत हो चुकी थी, इसलिए 21 पुलिसकर्मियों के बरी होने का फैसला अब इस नई चुनौती का केंद्र बना है।

भाई ने क्यों किया सुप्रीम कोर्ट का रुख?

सोहराबुद्दीन के भाई की ओर से दायर याचिका में विशेष अदालत के फैसले पर सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ता का कहना है कि मामले में उपलब्ध सामग्री और परिस्थितियों को देखते हुए आरोपियों को बरी करने के फैसले की दोबारा न्यायिक समीक्षा की जरूरत है।

हालांकि, अपील दायर होने का मतलब यह नहीं है कि सुप्रीम कोर्ट ने आरोपियों को दोषी मान लिया है। अब शीर्ष अदालत यह देखेगी कि याचिका सुनवाई योग्य है या नहीं और क्या निचली अदालत के फैसले में ऐसा कोई कानूनी आधार है, जिसके कारण उसमें हस्तक्षेप किया जाना चाहिए।

मामले की जांच और सुनवाई क्यों रही खास?

सोहराबुद्दीन केस देश के सबसे चर्चित पुलिस एनकाउंटर मामलों में से एक रहा है। इसकी जांच पहले गुजरात पुलिस से जुड़ी थी, लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर जांच और सुनवाई से जुड़े महत्वपूर्ण कदम उठाए गए। मामले को गुजरात से महाराष्ट्र ट्रांसफर करने का फैसला भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा था।

सुनवाई के दौरान कई गवाहों के बयान और जांच से जुड़े दस्तावेज अदालत के सामने रखे गए। हालांकि, विशेष सीबीआई अदालत ने अभियोजन पक्ष के मामले को आरोपियों को दोषी ठहराने के लिए पर्याप्त नहीं माना और सभी बचे हुए आरोपियों को बरी कर दिया।

अब आगे क्या होगा?

अब सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका पर आगे की कानूनी प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। अदालत पहले याचिका और रिकॉर्ड को देखेगी। इसके बाद यह तय हो सकता है कि मामले में संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया जाए या याचिका पर आगे सुनवाई की जाए।

अपील की प्रक्रिया में अदालत आम तौर पर यह देखती है कि निचली अदालत के फैसले में कोई गंभीर कानूनी या तथ्यात्मक गलती तो नहीं हुई। इसलिए इस मामले में भी सिर्फ पुराने आरोपों के आधार पर फैसला नहीं होगा, बल्कि उपलब्ध रिकॉर्ड और कानूनी दलीलों का परीक्षण किया जाएगा।

फिर चर्चा में आया पुराना मामला

सोहराबुद्दीन शेख केस का नाम भारतीय न्याय व्यवस्था और पुलिस कार्रवाई को लेकर होने वाली चर्चाओं में लंबे समय से आता रहा है। इस मामले में हुई जांच, आरोपियों की गिरफ्तारी, गवाहों के बयान और बाद में बरी किए जाने तक की पूरी प्रक्रिया काफी लंबी रही है।

अब सोहराबुद्दीन के भाई द्वारा सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने से मामले का एक और कानूनी अध्याय शुरू हो सकता है। फिलहाल यह स्पष्ट करना जरूरी है कि 21 पुलिसकर्मियों को बरी करने वाला विशेष अदालत का फैसला ही चुनौती के केंद्र में है और सुप्रीम कोर्ट में याचिका पर आगे होने वाली सुनवाई यह तय करेगी कि इस मामले को आगे किस दिशा में ले जाया जाता है।

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