भारत-विदेश व्यापार समझौतों के विरोध में संयुक्त किसान मोर्चा का देशव्यापी प्रदर्शन का ऐलान

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संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने भारत और विभिन्न देशों के बीच होने वाले व्यापार समझौतों के विरोध में देशभर में प्रदर्शन करने का आह्वान किया है। किसान संगठन का कहना है कि इन व्यापार समझौतों का सीधा असर देश के किसानों, कृषि बाजार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। इसी चिंता को लेकर एसकेएम ने किसानों, मजदूर संगठनों और अन्य सामाजिक समूहों से बड़े स्तर पर आंदोलन में शामिल होने की अपील की है।

संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं का कहना है कि हाल के वर्षों में भारत ने कई देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) और अन्य व्यापारिक समझौते किए हैं। उनका आरोप है कि इन समझौतों से विदेशी कृषि उत्पादों का आयात बढ़ सकता है, जिससे घरेलू किसानों को अपनी उपज का उचित मूल्य मिलने में कठिनाई हो सकती है। संगठन का मानना है कि यदि सस्ते विदेशी उत्पाद भारतीय बाजार में बड़ी मात्रा में पहुंचते हैं, तो इसका सबसे अधिक नुकसान छोटे और मध्यम किसानों को होगा।

एसकेएम ने कहा कि सरकार को किसी भी अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर करने से पहले किसान संगठनों और कृषि विशेषज्ञों से व्यापक चर्चा करनी चाहिए। संगठन का आरोप है कि किसानों की राय लिए बिना ऐसे फैसले किए जा रहे हैं, जिनका प्रभाव सीधे कृषि क्षेत्र पर पड़ सकता है। किसानों का कहना है कि कृषि केवल एक व्यवसाय नहीं, बल्कि करोड़ों परिवारों की आजीविका का आधार है।

देशव्यापी प्रदर्शन के तहत विभिन्न राज्यों में जिला मुख्यालयों, तहसीलों और सरकारी कार्यालयों के बाहर धरना, रैली और ज्ञापन सौंपने जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। किसान नेताओं ने कहा कि यह आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से किया जाएगा। उन्होंने सभी प्रदर्शनकारियों से कानून-व्यवस्था बनाए रखने और शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने की अपील की है।

किसान संगठनों की प्रमुख मांग है कि सरकार व्यापार समझौतों के उन प्रावधानों को सार्वजनिक करे, जिनका असर कृषि क्षेत्र पर पड़ सकता है। उनका कहना है कि पारदर्शिता बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है ताकि किसान भविष्य के संभावित प्रभावों को समझ सकें। साथ ही उन्होंने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी और कृषि क्षेत्र की सुरक्षा के लिए ठोस नीतियां लागू करने की भी मांग दोहराई।

दूसरी ओर सरकार का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों का उद्देश्य भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करना, निर्यात बढ़ाना और वैश्विक बाजारों में नए अवसर पैदा करना है। सरकार का दावा है कि इन समझौतों से किसानों सहित कई क्षेत्रों को लंबे समय में लाभ मिल सकता है। अधिकारियों का कहना है कि सभी समझौते राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखकर किए जाते हैं और घरेलू उद्योगों व कृषि क्षेत्र की सुरक्षा के लिए आवश्यक प्रावधान भी शामिल किए जाते हैं।

इस मुद्दे पर कृषि विशेषज्ञों की राय भी अलग-अलग है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यदि उचित सुरक्षा उपायों के साथ व्यापार समझौते लागू किए जाएं तो भारतीय कृषि को नए निर्यात बाजार मिल सकते हैं। वहीं अन्य विशेषज्ञों का कहना है कि छोटे किसानों के हितों की रक्षा के लिए विशेष नीति और वित्तीय सहायता की आवश्यकता होगी, ताकि वे अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा का सामना कर सकें।

राजनीतिक दलों ने भी इस मुद्दे पर अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दी है। कुछ विपक्षी दलों ने किसान संगठनों की मांगों का समर्थन करते हुए सरकार से व्यापक चर्चा की अपील की है। वहीं सरकार समर्थक नेताओं का कहना है कि व्यापार समझौतों को केवल विरोध के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि उनके आर्थिक लाभों का भी मूल्यांकन किया जाना चाहिए।

संयुक्त किसान मोर्चा ने स्पष्ट किया है कि यदि सरकार उनकी चिंताओं पर गंभीरता से विचार नहीं करती, तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। संगठन ने कहा कि किसानों के हितों की रक्षा के लिए वह लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाता रहेगा। आने वाले दिनों में देश के कई हिस्सों में प्रस्तावित प्रदर्शन इस मुद्दे को राष्ट्रीय बहस का विषय बना सकते हैं।

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