जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग पर भाजपा को भी न्योता, सर्वदलीय बैठक में शामिल होने का आग्रह

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जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। इस मुद्दे पर चर्चा के लिए आयोजित बैठक में भाजपा को भी आमंत्रित किया गया है। विपक्षी दलों का कहना है कि जम्मू-कश्मीर के लोगों की आकांक्षाओं और लोकतांत्रिक अधिकारों को ध्यान में रखते हुए राज्य का दर्जा जल्द बहाल किया जाना चाहिए।

जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को लेकर केंद्र शासित प्रदेश में राजनीतिक दलों ने सक्रियता बढ़ा दी है। इस मुद्दे पर चर्चा के लिए बुलाई जा रही बैठक में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को भी आमंत्रित किया गया है। आयोजकों का कहना है कि यह विषय पूरे जम्मू-कश्मीर से जुड़ा है, इसलिए सभी प्रमुख राजनीतिक दलों की भागीदारी जरूरी है।

गौरतलब है कि अगस्त 2019 में केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को हटाते हुए राज्य का पुनर्गठन किया था। इसके बाद जम्मू-कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश और लद्दाख को अलग केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया। इसके बाद से ही कई राजनीतिक दल लगातार जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा वापस देने की मांग करते रहे हैं।

नेशनल कॉन्फ्रेंस, पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) और कांग्रेस समेत कई दलों का कहना है कि राज्य का दर्जा बहाल करना लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करने के लिए जरूरी है। इन दलों का तर्क है कि स्थानीय प्रशासन को अधिक अधिकार मिलने से लोगों की भागीदारी बढ़ेगी और क्षेत्र के विकास को गति मिलेगी।

बैठक के लिए भाजपा को न्योता दिए जाने को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि भाजपा ने 2019 में जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को समाप्त करने के फैसले का समर्थन किया था। भाजपा का कहना रहा है कि यह कदम राष्ट्रीय एकता और विकास के उद्देश्य से उठाया गया था।

वहीं, केंद्र सरकार पहले भी संसद में कह चुकी है कि जम्मू-कश्मीर में उचित समय पर राज्य का दर्जा बहाल किया जाएगा। हालांकि, इस संबंध में अभी तक कोई निश्चित समयसीमा घोषित नहीं की गई है। विधानसभा चुनाव के बाद जम्मू-कश्मीर में नई सरकार का गठन हुआ है, जिसके बाद राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग फिर से तेज हुई है।

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा एक ऐसा मुद्दा है जिस पर विभिन्न दलों के बीच मतभेद होने के बावजूद बातचीत की संभावना बनी हुई है। भाजपा की भागीदारी से इस मुद्दे पर राजनीतिक सहमति बनाने की कोशिश की जा सकती है।

अब सभी की नजर इस बात पर है कि भाजपा इस बैठक में शामिल होती है या नहीं और राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग पर उसका रुख क्या रहता है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा जम्मू-कश्मीर की राजनीति में प्रमुख भूमिका निभा सकता है।

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