महाराष्ट्र में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक विधायक ने स्वतंत्रता सेनानी विनायक दामोदर सावरकर को भारत रत्न नहीं दिए जाने पर अपनी ही सरकार से सवाल किए हैं। विधायक ने कहा कि सावरकर के योगदान को देखते हुए उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित किया जाना चाहिए और इसमें हो रही देरी उचित नहीं है।
महाराष्ट्र की राजनीति में उस समय नई चर्चा शुरू हो गई, जब भाजपा के एक विधायक ने अपनी ही पार्टी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर विनायक दामोदर सावरकर को भारत रत्न नहीं दिए जाने को लेकर सवाल उठाए। विधायक ने सार्वजनिक रूप से कहा कि सावरकर का स्वतंत्रता आंदोलन और राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान रहा है, लेकिन उन्हें अब तक भारत रत्न से सम्मानित नहीं किया गया, जो निराशाजनक है।
विधायक ने कहा कि भाजपा लंबे समय से सावरकर के विचारों और उनके योगदान का सम्मान करती रही है। ऐसे में जब केंद्र और महाराष्ट्र दोनों जगह भाजपा या उसके नेतृत्व वाला गठबंधन सत्ता में है, तब भी सावरकर को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से वंचित रखा जाना समझ से परे है। उन्होंने सरकार से इस दिशा में जल्द निर्णय लेने की अपील की।

उन्होंने यह भी कहा कि सावरकर का जीवन संघर्ष, राष्ट्रभक्ति और सामाजिक सुधारों के लिए समर्पित था। उनके अनुसार, ऐसे व्यक्तित्व को भारत रत्न मिलना केवल एक सम्मान नहीं, बल्कि देश के इतिहास के प्रति न्याय भी होगा। विधायक ने पार्टी नेतृत्व से आग्रह किया कि इस विषय पर गंभीरता से विचार किया जाए।
सावरकर को भारत रत्न देने की मांग नई नहीं है। भाजपा और उसके सहयोगी दलों के कई नेता समय-समय पर यह मांग उठाते रहे हैं। वहीं दूसरी ओर विपक्ष के कुछ दल और इतिहासकार सावरकर की भूमिका को लेकर अलग राय रखते हैं। विशेष रूप से ब्रिटिश शासन के दौरान दायर की गई दया याचिकाओं और स्वतंत्रता आंदोलन में उनकी भूमिका को लेकर लंबे समय से राजनीतिक और वैचारिक बहस होती रही है।
कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों का कहना है कि भारत रत्न जैसे सर्वोच्च सम्मान के लिए चयन करते समय सभी ऐतिहासिक पहलुओं पर विचार किया जाना चाहिए। वहीं भाजपा का तर्क है कि सावरकर को केवल विवादों के आधार पर नहीं, बल्कि उनके व्यापक योगदान और राष्ट्रवादी विचारों के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
भारत रत्न देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है, जो कला, साहित्य, विज्ञान, सार्वजनिक सेवा और मानव प्रयास के किसी भी क्षेत्र में असाधारण योगदान देने वाले व्यक्तियों को प्रदान किया जाता है। इस सम्मान के लिए नामों की अनुशंसा प्रधानमंत्री द्वारा राष्ट्रपति को की जाती है और अंतिम निर्णय केंद्र सरकार की प्रक्रिया के अनुसार लिया जाता है।
भाजपा विधायक के इस बयान ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है, क्योंकि यह सवाल विपक्ष की ओर से नहीं बल्कि सत्तारूढ़ दल के भीतर से उठा है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि केंद्र सरकार इस मांग पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया देती है या नहीं। फिलहाल सावरकर को भारत रत्न देने का कोई औपचारिक सरकारी ऐलान नहीं किया गया है।