नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहा प्रदर्शन लगातार तीसरे दिन भी जारी रहा। बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी सुबह से ही धरना स्थल पर जुटे और अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कोई सकारात्मक फैसला नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। राजधानी के प्रमुख विरोध स्थलों में शामिल जंतर-मंतर एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियों का केंद्र बन गया है।
प्रदर्शन में शामिल लोगों का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला है। उनका आरोप है कि संबंधित विभागों के साथ कई दौर की बातचीत के बावजूद समस्याओं का समाधान नहीं हो पाया। इसी कारण उन्होंने धरना जारी रखने का निर्णय लिया है।
धरना स्थल पर विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि भी पहुंचे और प्रदर्शनकारियों के समर्थन में अपनी बात रखी। वक्ताओं ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध हर नागरिक का अधिकार है। उन्होंने सरकार से अपील की कि आंदोलन को नजरअंदाज करने के बजाय बातचीत के जरिए समाधान निकाला जाए। प्रदर्शन के दौरान लोगों ने हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर अपनी मांगों को सार्वजनिक रूप से रखा।

तीसरे दिन आंदोलन में पहले की तुलना में अधिक लोगों की मौजूदगी देखने को मिली। कई सामाजिक संगठनों और नागरिक समूहों ने भी समर्थन का ऐलान किया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यदि सरकार ने जल्द वार्ता शुरू नहीं की तो देश के अन्य राज्यों में भी इसी तरह के विरोध कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। उनका दावा है कि यह आंदोलन केवल एक समूह का नहीं बल्कि व्यापक जनहित से जुड़े मुद्दों का प्रतिनिधित्व करता है।
धरना स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए दिल्ली पुलिस की अतिरिक्त तैनाती की गई है। पुलिस अधिकारियों ने पूरे क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी है ताकि किसी प्रकार की अप्रिय घटना न हो। प्रशासन ने कहा है कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से जारी रहे, इसके लिए सभी आवश्यक इंतजाम किए गए हैं। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों से कानून-व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करने की अपील भी की।
इस बीच प्रदर्शनकारियों और प्रशासन के बीच संवाद की संभावनाओं पर भी चर्चा जारी है। सूत्रों के अनुसार, संबंधित अधिकारियों की ओर से प्रतिनिधियों से बातचीत की कोशिश की जा रही है। हालांकि प्रदर्शनकारी नेताओं का कहना है कि केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा, बल्कि उनकी मांगों पर लिखित और ठोस निर्णय लिया जाना चाहिए।
राजनीतिक दलों की ओर से भी इस आंदोलन पर प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ विपक्षी नेताओं ने प्रदर्शनकारियों की मांगों का समर्थन करते हुए सरकार से तत्काल समाधान निकालने की अपील की है। वहीं सरकार समर्थक नेताओं का कहना है कि किसी भी मुद्दे का समाधान बातचीत और संवैधानिक प्रक्रिया के तहत ही संभव है तथा कानून-व्यवस्था बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि आंदोलन लंबा चलता है और इसमें लोगों की भागीदारी लगातार बढ़ती है, तो इसका असर राजनीतिक माहौल पर भी पड़ सकता है। राजधानी में लंबे समय तक चलने वाले धरने अक्सर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन जाते हैं और सरकार पर समाधान निकालने का दबाव बढ़ाते हैं।
धरना स्थल पर मौजूद प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी प्रकार का टकराव पैदा करना नहीं है। वे केवल अपनी समस्याओं का समाधान चाहते हैं और जब तक उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया जाएगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने साफ किया कि आगे की रणनीति जल्द घोषित की जाएगी, जिसमें बड़े स्तर पर रैलियां और जनसभाएं भी शामिल हो सकती हैं।
फिलहाल जंतर-मंतर पर स्थिति शांतिपूर्ण बनी हुई है, लेकिन आंदोलन के तेवर पहले की तुलना में अधिक सख्त दिखाई दे रहे हैं। अब सभी की निगाहें सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच संभावित बातचीत पर टिकी हैं। यदि जल्द कोई सहमति नहीं बनती, तो आने वाले दिनों में यह आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है।