दुनिया के कई हिस्सों में इस समय गंभीर जल संकट देखने को मिल रहा है। लगातार बढ़ते तापमान, कम वर्षा और जलवायु परिवर्तन के कारण कई देशों में सूखे जैसी स्थिति बन गई है। इससे खेती, पेयजल आपूर्ति और खाद्य सुरक्षा पर बड़ा असर पड़ रहा है।
प्रमुख स्थिति
- यूरोप: इटली की प्रमुख पो नदी (Po River) का जलस्तर तेजी से घट गया है। नदी में समुद्री खारा पानी लगभग 18 किलोमीटर अंदर तक पहुंच गया है, जिससे धान, मक्का, सोयाबीन और सूरजमुखी जैसी फसलें प्रभावित हो रही हैं। कई क्षेत्रों में सिंचाई सीमित करनी पड़ी है।
- अमेरिका: भीषण गर्मी और लंबे सूखे के कारण पश्चिमी राज्यों में जलाशयों का स्तर घट रहा है। Colorado River बेसिन में पानी की कमी से सिंचाई, पेयजल और जलविद्युत उत्पादन पर दबाव बढ़ा है।

अफ्रीका और एशिया: विशेषज्ञों के अनुसार विकसित हो रहे El Niño के कारण दक्षिणी अफ्रीका, साहेल क्षेत्र, दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के कई इलाकों में कृषि सूखे का खतरा बढ़ गया है।
खेती पर असर
- सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता घट रही है।
- धान, गेहूं, मक्का और अन्य फसलों का उत्पादन कम होने की आशंका है।
- किसानों की लागत बढ़ रही है और खाद्य पदार्थों की कीमतों पर दबाव पड़ सकता है।
पीने के पानी पर प्रभाव
- कई क्षेत्रों में जलाशयों और नदियों का जलस्तर घटने से पेयजल आपूर्ति प्रभावित हो रही है।
- कुछ स्थानों पर पानी की बचत के लिए लोगों से कम पानी उपयोग करने की अपील की गई है।

विशेषज्ञों की चेतावनी
संयुक्त राष्ट्र और जल विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जल संसाधनों का बेहतर प्रबंधन नहीं किया गया और जलवायु परिवर्तन के प्रभाव कम नहीं हुए, तो आने वाले वर्षों में जल संकट और गंभीर हो सकता है। 2026 की कई अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में चेतावनी दी गई है कि दुनिया के अनेक क्षेत्र बढ़ते जल तनाव (Water Stress) का सामना कर रहे हैं।