भारत और कनाडा के बीच पिछले कुछ वर्षों में तनावपूर्ण रहे रिश्तों के बाद अब संबंधों में सुधार के संकेत दिखाई दे रहे हैं। दोनों देशों ने व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (Comprehensive Economic Partnership Agreement – CEPA) पर बातचीत तेज़ कर दी है और वर्ष 2026 के अंत तक व्यापार समझौता पूरा करने का लक्ष्य रखा है।
प्रधानमंत्री स्तर पर हुई अहम बैठक
हाल ही में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की मुलाकात में दोनों नेताओं ने व्यापार, निवेश, ऊर्जा, रक्षा और सुरक्षा सहयोग को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई। इस बैठक को दोनों देशों के संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

पार समझौते पर प्रगति
दोनों देशों के बीच प्रस्तावित CEPA के तहत आयात-निर्यात को आसान बनाने, व्यापारिक शुल्क कम करने और निवेश बढ़ाने पर काम हो रहा है। भारत के वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, वार्ता अब काफी उन्नत चरण में है और जल्द अंतिम रूप दिए जाने की उम्मीद है।
ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिजों पर सहयोग
भारत और कनाडा ने यूरेनियम, महत्वपूर्ण खनिज (Critical Minerals), स्वच्छ ऊर्जा और परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति जताई है। यह साझेदारी भारत की ऊर्जा सुरक्षा और स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

भारत को क्या लाभ होगा?
- भारतीय निर्यातकों को कनाडा के बाजार में बेहतर पहुंच मिलेगी।
- आईटी, फार्मास्यूटिकल्स, कृषि और इंजीनियरिंग उत्पादों के निर्यात में वृद्धि की संभावना है।
- कनाडा से निवेश बढ़ने से रोजगार और औद्योगिक विकास को गति मिल सकती है।
कनाडा को क्या फायदा होगा?
- कनाडाई कंपनियों को भारत के विशाल उपभोक्ता बाजार तक बेहतर पहुंच मिलेगी।
- ऊर्जा, शिक्षा, खनन, कृषि और स्वच्छ तकनीक के क्षेत्रों में नए निवेश और व्यापारिक अवसर मिलेंगे।
- दोनों देशों के बीच आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) सहयोग भी मजबूत होने की उम्मीद है।
निष्कर्ष
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि व्यापार समझौता तय समय पर पूरा हो जाता है, तो भारत–कनाडा आर्थिक संबंध एक नए दौर में प्रवेश करेंगे। इससे द्विपक्षीय व्यापार, निवेश और रणनीतिक सहयोग को नई गति मिलेगी तथा दोनों देशों के बीच पिछले वर्षों का तनाव कम करने में भी मदद मिल सकती है।