भारत और फ्रांस के बीच रणनीतिक और आर्थिक संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं। हाल ही में भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण चार दिवसीय आधिकारिक दौरे पर फ्रांस पहुंचीं, जहां उनका मुख्य उद्देश्य फ्रांसीसी कंपनियों को भारत में निवेश के लिए प्रोत्साहित करना और दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को और मजबूत करना है।
निवेश बढ़ाने पर जोर
फ्रांस में आयोजित बैठकों के दौरान भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने वैश्विक निवेशकों को भारत की तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, विनिर्माण (Manufacturing) और हरित ऊर्जा (Green Energy) क्षेत्रों में उपलब्ध अवसरों की जानकारी दी। सरकार का लक्ष्य फ्रांस से अधिक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) आकर्षित करना है।

रक्षा सहयोग होगा और मजबूत
भारत और फ्रांस पहले से ही रक्षा क्षेत्र में करीबी साझेदार हैं। दोनों देश राफेल लड़ाकू विमान, पनडुब्बियों, हेलीकॉप्टर निर्माण और रक्षा तकनीक के क्षेत्र में सहयोग कर रहे हैं। हाल की बैठकों में रक्षा उत्पादन, संयुक्त विनिर्माण और नई तकनीकों पर सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा हुई।
व्यापार और तकनीक पर फोकस
दोनों देशों ने अगले पाँच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), सेमीकंडक्टर, अंतरिक्ष, साइबर सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा और नागरिक परमाणु ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाया जाएगा। साथ ही “मेक इन इंडिया” के तहत फ्रांसीसी कंपनियों के निवेश को भी बढ़ावा दिया जाएगा।

विशेष रणनीतिक साझेदारी
इस वर्ष भारत और फ्रांस ने अपने संबंधों को “स्पेशल ग्लोबल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप” का दर्जा दिया है। इसका उद्देश्य रक्षा, व्यापार, तकनीक, हिंद-प्रशांत क्षेत्र, जलवायु परिवर्तन और वैश्विक सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में दीर्घकालिक सहयोग को और मजबूत करना है।
निष्कर्ष
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत–फ्रांस की बढ़ती साझेदारी से दोनों देशों को व्यापार, निवेश, रक्षा और उन्नत तकनीक के क्षेत्रों में बड़ा लाभ मिलेगा। यह सहयोग वैश्विक स्तर पर भारत की रणनीतिक और आर्थिक स्थिति को भी और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।