भारत और ब्रिटेन (UK) के बीच हुआ मुक्त व्यापार समझौता (Free Trade Agreement – FTA) 15 जुलाई 2026 से लागू होने जा रहा है। इसके लागू होने से पहले ही भारतीय निर्यातकों को ब्रिटेन से बड़े पैमाने पर नए ऑर्डर मिलने शुरू हो गए हैं। ब्रिटेन के आयातक कम शुल्क (टैरिफ) का लाभ लेने के लिए अग्रिम खरीदारी कर रहे हैं।
क्या है यह समझौता?
भारत–यूके FTA का उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देना है। समझौते के तहत हजारों उत्पादों पर आयात शुल्क कम या समाप्त किया जाएगा, जिससे दोनों देशों की कंपनियों के लिए कारोबार करना आसान होगा।

भारत को क्या फायदा होगा?
इस समझौते से भारत के कई उद्योगों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है, जैसे:
- वस्त्र (Textiles) और रेडीमेड गारमेंट्स
- चमड़ा और फुटवियर
- जेम्स एवं ज्वेलरी
- इंजीनियरिंग उत्पाद
- ऑटो पार्ट्स
- खाद्य और कृषि उत्पाद
कम शुल्क के कारण भारतीय उत्पाद ब्रिटेन में अधिक प्रतिस्पर्धी होंगे, जिससे निर्यात और रोजगार बढ़ने की संभावना है।
ब्रिटेन को क्या लाभ मिलेगा?
ब्रिटेन की कंपनियों को भारत के बड़े उपभोक्ता बाजार तक बेहतर पहुंच मिलेगी। विशेष रूप से:
- व्हिस्की और अन्य पेय पदार्थ
- ऑटोमोबाइल
- मशीनरी
- चिकित्सा उपकरण
- वित्तीय और पेशेवर सेवाएं
इन क्षेत्रों में व्यापार और निवेश के नए अवसर बनने की उम्मीद है।
व्यापार पर संभावित असर
विशेषज्ञों का मानना है कि FTA लागू होने के बाद दोनों देशों के बीच व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। भारतीय निर्यातकों को पहले से अधिक ऑर्डर मिलने लगे हैं, क्योंकि ब्रिटिश कंपनियां नई टैरिफ व्यवस्था का लाभ उठाना चाहती हैं। इससे विशेष रूप से MSME और निर्यात-उन्मुख उद्योगों को बढ़ावा मिल सकता है।
निष्कर्ष
भारत–यूके FTA दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है। इससे व्यापार, निवेश, रोजगार और उद्योगों को नई गति मिलने की उम्मीद है, साथ ही भारत की वैश्विक व्यापारिक स्थिति भी और मजबूत हो सकती है।