भारत ने हाल ही में BRICS मंच पर अपनी विदेश नीति को और आक्रामक और सक्रिय तरीके से सामने रखा है। इस बैठक में भारत ने साफ संदेश दिया कि दुनिया में चल रहे युद्ध, तनाव और मानवीय संकटों को रोकने के लिए वैश्विक संस्थाओं को मजबूत करना अब बेहद जरूरी हो गया है। खासकर गाजा में चल रहे संघर्ष और संयुक्त राष्ट्र (UN) की कार्यप्रणाली को लेकर भारत ने कई अहम मुद्दे उठाए।

BRICS में भारत की सक्रिय भूमिका
BRICS देशों की बैठक में भारत ने न सिर्फ आर्थिक मुद्दों पर बात की, बल्कि वैश्विक शांति और सुरक्षा को भी एजेंडा का हिस्सा बनाया। भारत ने कहा कि दुनिया आज ऐसे मोड़ पर है जहां छोटे-छोटे संघर्ष भी बड़े मानवीय संकट में बदल रहे हैं, इसलिए समय पर हस्तक्षेप जरूरी है।
विदेश मंत्री ने इस मंच पर यह भी दोहराया कि भारत हमेशा “dialogue and diplomacy” यानी बातचीत और कूटनीति के पक्ष में रहा है, और किसी भी समस्या का समाधान युद्ध नहीं बल्कि बातचीत से होना चाहिए।
⚠️ गाजा सीजफायर पर भारत का रुख
भारत ने गाजा में चल रहे संघर्ष को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। भारत का कहना है कि वहां आम नागरिकों की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है और मानवीय सहायता (humanitarian aid) को बिना रुकावट पहुंचाना चाहिए।
भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि:
- तुरंत संघर्ष विराम (ceasefire) लागू किया जाए
- नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए
- और बातचीत के जरिए स्थायी समाधान खोजा जाए
भारत का यह रुख दिखाता है कि वह किसी एक पक्ष के बजाय शांति और मानवीय दृष्टिकोण को प्राथमिकता दे रहा है।
🏛️ UN सुधार की मांग क्यों उठी?
भारत ने इस बैठक में संयुक्त राष्ट्र (UN) में बड़े सुधार की जरूरत पर भी जोर दिया। भारत का मानना है कि 1945 में बनी यह संस्था आज की दुनिया की वास्तविकताओं को पूरी तरह से प्रतिनिधित्व नहीं कर पा रही है।
भारत की मुख्य मांगें:
- UN Security Council का विस्तार
- विकासशील देशों को अधिक प्रतिनिधित्व
- और निर्णय प्रक्रिया को ज्यादा पारदर्शी बनाना
भारत का तर्क है कि आज की वैश्विक ताकतें और जनसंख्या संरचना 80 साल पुरानी व्यवस्था में फिट नहीं बैठती, इसलिए बदलाव जरूरी है।
⚖️ भारत की नीति का मूल सिद्धांत
भारत की विदेश नीति का आधार हमेशा से “strategic autonomy” रहा है, यानी किसी एक देश या ब्लॉक पर निर्भर न रहकर अपने राष्ट्रीय हितों के अनुसार निर्णय लेना।
इसी वजह से भारत:
- रूस, अमेरिका, यूरोप और मिडिल ईस्ट सभी के साथ संतुलित संबंध रखता है
- और किसी भी संघर्ष में सीधे पक्ष लेने से बचते हुए शांति पर जोर देता है