भारत के इंडस्ट्रियल हीट इलेक्ट्रिफिकेशन के लिए कॉमन ब्लूप्रिंट की तैयारी, उद्योगों में ऊर्जा बदलाव की नई शुरुआत

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भारत के औद्योगिक क्षेत्र में ऊर्जा बदलाव की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सामने आ रही है। उद्योगों में उपयोग होने वाली ऊष्मा यानी इंडस्ट्रियल हीट को जीवाश्म ईंधन से हटाकर बिजली आधारित प्रणालियों की ओर ले जाने के लिए एक कॉमन ब्लूप्रिंट तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारत की स्वच्छ ऊर्जा, ऊर्जा सुरक्षा और कार्बन उत्सर्जन घटाने की रणनीति में अहम भूमिका निभा सकता है।

भारत के विनिर्माण क्षेत्र में बड़ी मात्रा में ऊर्जा भट्टियों, बॉयलरों, ड्रायर, भाप प्रणालियों और अन्य ऊष्मा-आधारित प्रक्रियाओं में खर्च होती है। अभी इनका बड़ा हिस्सा कोयला, डीजल, फर्नेस ऑयल और प्राकृतिक गैस जैसे ईंधनों पर निर्भर है। औद्योगिक हीट इलेक्ट्रिफिकेशन का अर्थ है इन प्रक्रियाओं को बिजली आधारित तकनीकों जैसे इलेक्ट्रिक बॉयलर, इंडक्शन हीटिंग, रेसिस्टिव हीटिंग और हीट पंप से संचालित करना।

विशेषज्ञों के अनुसार समस्या केवल तकनीक की उपलब्धता की नहीं है। अलग-अलग उद्योगों की तापमान आवश्यकताएं, ऊर्जा खपत, लागत संरचना और संचालन पद्धति भिन्न होती है। इसी कारण एक साझा मार्गदर्शिका या ब्लूप्रिंट की आवश्यकता महसूस की जा रही है ताकि उद्योगों को तकनीकी चयन, निवेश, ऊर्जा दक्षता और चरणबद्ध परिवर्तन के लिए स्पष्ट दिशा मिल सके।

भारत ने 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य घोषित किया है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए बिजली उत्पादन के साथ-साथ उद्योगों का डीकार्बोनाइजेशन भी आवश्यक माना जा रहा है। सीमेंट, स्टील, खाद्य प्रसंस्करण, वस्त्र, रसायन, कागज और फार्मास्यूटिकल्स जैसे क्षेत्रों में बड़ी मात्रा में ऊष्मा ऊर्जा का उपयोग होता है। यदि इन क्षेत्रों में स्वच्छ बिजली आधारित समाधान अपनाए जाते हैं, तो कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।

इलेक्ट्रिफिकेशन का सबसे बड़ा लाभ ऊर्जा दक्षता में सुधार माना जाता है। कई आधुनिक इलेक्ट्रिक हीटिंग तकनीकें पारंपरिक ईंधन प्रणालियों की तुलना में अधिक नियंत्रित और कुशल होती हैं। उदाहरण के लिए इंडक्शन हीटिंग सीधे धातु को गर्म करती है, जिससे ऊर्जा की बर्बादी कम होती है। इसी तरह हीट पंप कम बिजली खर्च करके अधिक ऊष्मा उपलब्ध करा सकते हैं।

ऊर्जा की खपत और उपयोगी ऊष्मा के संबंध को समझना इस बदलाव की बुनियाद है। किसी प्रणाली में ऊर्जा जितनी कुशलता से उपयोगी गर्मी में बदलती है, उतनी ही कम ऊर्जा व्यर्थ जाती है। यही कारण है कि उच्च दक्षता वाली इलेक्ट्रिक हीटिंग तकनीकों को भविष्य की औद्योगिक प्रणालियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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