वैश्विक अर्थव्यवस्था में जारी अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की आर्थिक प्रगति को लेकर उद्योग जगत का भरोसा लगातार मजबूत बना हुआ है। ITC के चेयरमैन संजीव पुरी ने कहा है कि भारत आज भी दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है। उनका मानना है कि मजबूत घरेलू मांग, तेजी से विकसित हो रहा बुनियादी ढांचा, डिजिटल परिवर्तन और सरकार द्वारा किए जा रहे आर्थिक सुधार भारत को वैश्विक स्तर पर एक मजबूत आर्थिक शक्ति के रूप में आगे बढ़ा रहे हैं।
संजीव पुरी के अनुसार, दुनिया के कई देशों में आर्थिक सुस्ती, भू-राजनीतिक तनाव और सप्लाई चेन से जुड़ी चुनौतियां देखने को मिल रही हैं। इसके बावजूद भारत ने अपनी विकास गति को बनाए रखा है। उन्होंने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा आधार उसका विशाल घरेलू बाजार, बढ़ता मध्यम वर्ग और उपभोग आधारित विकास मॉडल है। यही कारण है कि वैश्विक परिस्थितियां कठिन होने के बावजूद भारत निवेशकों के लिए एक आकर्षक बाजार बना हुआ है।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार द्वारा बुनियादी ढांचे में लगातार किया जा रहा निवेश, सड़क, रेलवे, बंदरगाह, हवाई अड्डों और डिजिटल नेटवर्क का विस्तार उद्योगों के लिए बेहतर माहौल तैयार कर रहा है। बेहतर कनेक्टिविटी से लॉजिस्टिक्स लागत कम होती है, उत्पादन क्षमता बढ़ती है और व्यापार को नई गति मिलती है। इससे घरेलू कंपनियों के साथ-साथ विदेशी निवेशकों का भी भारत पर भरोसा बढ़ा है।

भारत में डिजिटल क्रांति को भी आर्थिक विकास का एक महत्वपूर्ण आधार माना जा रहा है। डिजिटल भुगतान, ऑनलाइन सेवाओं, ई-कॉमर्स और तकनीक आधारित नवाचारों ने कारोबार करने का तरीका बदल दिया है। छोटे व्यवसायों से लेकर बड़ी कंपनियों तक, सभी डिजिटल तकनीकों का अधिक उपयोग कर रहे हैं। इससे पारदर्शिता बढ़ी है और व्यापारिक प्रक्रियाएं पहले की तुलना में अधिक तेज और प्रभावी हुई हैं।
संजीव पुरी का मानना है कि भारत का युवा कार्यबल भी आर्थिक विकास की सबसे बड़ी ताकतों में से एक है। बड़ी संख्या में कुशल और प्रशिक्षित युवा देश के विनिर्माण, सेवा, सूचना प्रौद्योगिकी और स्टार्टअप क्षेत्रों को नई ऊर्जा दे रहे हैं। यदि कौशल विकास और रोजगार सृजन की दिशा में इसी तरह प्रयास जारी रहे, तो भारत आने वाले वर्षों में वैश्विक अर्थव्यवस्था में और अधिक मजबूत भूमिका निभा सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत का विनिर्माण क्षेत्र भी तेजी से विस्तार कर रहा है। ‘मेक इन इंडिया’, उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) जैसी नीतियों और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने वाले प्रयासों से कई उद्योगों में निवेश बढ़ा है। इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, फार्मास्यूटिकल्स, रक्षा उत्पादन और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में भारत लगातार अपनी क्षमता मजबूत कर रहा है। इससे रोजगार के अवसर बढ़ने के साथ-साथ निर्यात को भी नई गति मिलने की संभावना है।
हालांकि आर्थिक विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि विकास की रफ्तार बनाए रखने के लिए कुछ चुनौतियों पर लगातार काम करना होगा। वैश्विक महंगाई, ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव, अंतरराष्ट्रीय व्यापार में अनिश्चितता और जलवायु परिवर्तन जैसी परिस्थितियां भविष्य में आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए नीति निर्माण, निवेश और नवाचार पर लगातार ध्यान देना आवश्यक होगा।
कॉरपोरेट जगत का मानना है कि भारत में उपभोक्ता मांग लगातार मजबूत बनी हुई है। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में खर्च बढ़ने से उपभोक्ता वस्तुओं, खाद्य उत्पादों, आवास, ऑटोमोबाइल और सेवाओं की मांग में वृद्धि देखने को मिल रही है। इससे कंपनियों को विस्तार के नए अवसर मिल रहे हैं और अर्थव्यवस्था को भी गति मिल रही है।
कुल मिलाकर, ITC के चेयरमैन संजीव पुरी का यह बयान भारत की आर्थिक संभावनाओं पर उद्योग जगत के विश्वास को दर्शाता है। वैश्विक चुनौतियों के बावजूद मजबूत घरेलू बाजार, तेज बुनियादी ढांचा विकास, डिजिटल परिवर्तन, निवेश-अनुकूल नीतियां और युवा जनसंख्या भारत को दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। आने वाले वर्षों में यदि सुधारों और निवेश की यही गति जारी रहती है, तो भारत वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में अपनी स्थिति को और अधिक मजबूत कर सकता है।