संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के जलवायु प्रमुख ने कहा है कि स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में भारत की तेज़ी से बढ़ती पहल वैश्विक ऊर्जा परिवर्तन (एनर्जी ट्रांजिशन) की चुनौतियों का एक मजबूत और व्यावहारिक जवाब है। उन्होंने कहा कि भारत ने पिछले कुछ वर्षों में नवीकरणीय ऊर्जा, हरित प्रौद्योगिकी और स्वच्छ ऊर्जा अवसंरचना में उल्लेखनीय प्रगति की है, जिससे न केवल जलवायु परिवर्तन से निपटने में मदद मिलेगी बल्कि टिकाऊ आर्थिक विकास को भी नई गति मिलेगी।
यूएन जलवायु प्रमुख के अनुसार, दुनिया इस समय जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक विकास जैसी कई बड़ी चुनौतियों का एक साथ सामना कर रही है। ऐसे समय में भारत ने सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन और स्वच्छ बिजली उत्पादन पर जिस तरह से निवेश बढ़ाया है, वह अन्य देशों के लिए भी प्रेरणादायक उदाहरण बन सकता है। उनका मानना है कि विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है और भारत इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठा रहा है।
उन्होंने कहा कि ऊर्जा परिवर्तन केवल जीवाश्म ईंधन से दूरी बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य ऐसी ऊर्जा व्यवस्था तैयार करना है जो सस्ती, विश्वसनीय, स्वच्छ और सभी लोगों के लिए सुलभ हो। भारत ने ग्रामीण क्षेत्रों तक बिजली पहुंचाने, सौर ऊर्जा परियोजनाओं को बढ़ावा देने और स्वच्छ ईंधन के उपयोग को प्रोत्साहित करने जैसे कई कार्यक्रमों के माध्यम से इस दिशा में सकारात्मक प्रगति दिखाई है।

भारत सरकार ने भी पिछले कुछ वर्षों में नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता बढ़ाने के लिए कई महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किए हैं। सौर पार्कों का विस्तार, रूफटॉप सोलर परियोजनाएं, इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा, बैटरी स्टोरेज तकनीक और ग्रीन हाइड्रोजन मिशन जैसी योजनाएं ऊर्जा क्षेत्र में बड़े बदलाव का हिस्सा मानी जा रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इन पहलों से भविष्य में कार्बन उत्सर्जन कम करने और ऊर्जा आयात पर निर्भरता घटाने में मदद मिल सकती है।
संयुक्त राष्ट्र के जलवायु प्रमुख ने यह भी कहा कि विकासशील देशों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वे आर्थिक विकास की गति बनाए रखते हुए पर्यावरणीय लक्ष्यों को भी पूरा करें। उनके अनुसार भारत ने इस दिशा में संतुलित दृष्टिकोण अपनाने का प्रयास किया है, जहां ऊर्जा की बढ़ती मांग को पूरा करने के साथ-साथ स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों का विस्तार भी किया जा रहा है।
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के पास दुनिया के सबसे बड़े सौर ऊर्जा बाजारों में शामिल होने की क्षमता है। देश में पर्याप्त धूप, तेजी से विकसित हो रहा ऊर्जा ढांचा और बढ़ता निवेश इस क्षेत्र को मजबूत बना रहा है। इसके अलावा निजी कंपनियों और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों की भागीदारी भी स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं को नई गति दे रही है।
हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि ऊर्जा परिवर्तन की राह आसान नहीं है। इसके लिए बड़े पैमाने पर निवेश, आधुनिक बिजली ग्रिड, ऊर्जा भंडारण तकनीक, कुशल मानव संसाधन और नीति स्तर पर लगातार सुधार की आवश्यकता होगी। साथ ही कोयला आधारित ऊर्जा पर निर्भर क्षेत्रों में रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को ध्यान में रखते हुए संतुलित रणनीति अपनानी होगी।
जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों को देखते हुए दुनिया भर के देशों पर कार्बन उत्सर्जन कम करने का दबाव बढ़ रहा है। ऐसे में भारत की स्वच्छ ऊर्जा नीति वैश्विक जलवायु लक्ष्यों को हासिल करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि वर्तमान गति बनी रहती है, तो भारत आने वाले वर्षों में स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में दुनिया के अग्रणी देशों में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है।
यूएन जलवायु प्रमुख की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब दुनिया ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु संकट और सतत विकास के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है। भारत की स्वच्छ ऊर्जा पहल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिल रही सराहना इस बात का संकेत है कि देश हरित विकास की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है और भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को अधिक टिकाऊ तरीके से पूरा करने की तैयारी कर रहा है।