कर्नाटक ने इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। केंद्र सरकार के ताजा आंकड़ों के अनुसार राज्य में 6,805 सार्वजनिक ईवी चार्जिंग स्टेशन स्थापित हो चुके हैं, जिसके साथ कर्नाटक देश में दूसरे स्थान पर पहुंच गया है। यह आंकड़ा बताता है कि राज्य में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए बुनियादी ढांचे का तेजी से विस्तार हो रहा है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक सबसे अधिक चार्जिंग स्टेशन महाराष्ट्र में हैं, जबकि कर्नाटक दूसरे नंबर पर है। बेंगलुरु, मैसूरु, हुबली-धारवाड़, मंगलुरु और बेलगावी जैसे शहरों में चार्जिंग नेटवर्क तेजी से बढ़ा है। खास तौर पर बेंगलुरु को देश की ईवी राजधानी कहा जाता है और यहां निजी कंपनियों, स्टार्टअप्स तथा ऊर्जा कंपनियों ने बड़े पैमाने पर चार्जिंग सुविधाएं विकसित की हैं।
कर्नाटक सरकार लंबे समय से इलेक्ट्रिक वाहन नीति पर काम कर रही है। राज्य ने बैटरी निर्माण, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और ईवी उद्योग में निवेश आकर्षित करने के लिए कई प्रोत्साहन योजनाएं लागू की हैं। अधिकारियों का कहना है कि चार्जिंग स्टेशन की संख्या बढ़ने से लोगों का ईवी अपनाने का भरोसा मजबूत होता है, क्योंकि सबसे बड़ी चिंता चार्जिंग सुविधा की उपलब्धता ही होती है।
विशेषज्ञों के अनुसार सार्वजनिक चार्जिंग नेटवर्क किसी भी ईवी पारिस्थितिकी तंत्र की रीढ़ माना जाता है। यदि शहरों और राजमार्गों पर पर्याप्त चार्जिंग स्टेशन उपलब्ध हों तो लंबी दूरी की यात्रा करना आसान हो जाता है। कर्नाटक में अब कई प्रमुख राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर फास्ट चार्जिंग स्टेशन लगाए जा चुके हैं, जिससे अंतरशहरी यात्रा अधिक सुविधाजनक हुई है।
बेंगलुरु में आईटी कंपनियों, कॉरपोरेट पार्कों, मॉल, मेट्रो स्टेशनों और आवासीय परिसरों में भी चार्जिंग सुविधाएं तेजी से बढ़ रही हैं। कई कंपनियां अपने कर्मचारियों के लिए कार्यस्थल चार्जिंग की सुविधा उपलब्ध करा रही हैं। इससे निजी कारों के साथ-साथ इलेक्ट्रिक दोपहिया और तिपहिया वाहनों के उपयोग में भी वृद्धि देखने को मिल रही है।
सरकारी आंकड़े यह भी संकेत देते हैं कि ईवी बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है। दोपहिया, कार, बस और वाणिज्यिक वाहनों की श्रेणियों में इलेक्ट्रिक मॉडल तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार होने से वाहन निर्माताओं को भी नए मॉडल लॉन्च करने में सुविधा मिलती है।

ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि चार्जिंग स्टेशनों की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं है; उनकी गुणवत्ता, उपलब्धता और रखरखाव भी उतना ही महत्वपूर्ण है। कई जगहों पर फास्ट चार्जर, डिजिटल भुगतान, मोबाइल ऐप आधारित लोकेशन सेवा और रीयल टाइम उपलब्धता जैसी सुविधाएं शुरू की गई हैं, जिससे उपयोगकर्ताओं का अनुभव बेहतर हो रहा है।
कर्नाटक में ईवी उद्योग से रोजगार के अवसर भी बढ़ रहे हैं। चार्जिंग स्टेशन स्थापना, संचालन, रखरखाव, बैटरी सेवा और सॉफ्टवेयर प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में नई नौकरियां पैदा हो रही हैं। बेंगलुरु स्थित कई स्टार्टअप स्मार्ट चार्जिंग समाधान, बैटरी स्वैपिंग और ऊर्जा प्रबंधन तकनीकों पर काम कर रहे हैं।
हालांकि चुनौतियां अभी भी मौजूद हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार अपेक्षाकृत धीमा है और बिजली वितरण व्यवस्था को भी बढ़ती मांग के अनुरूप मजबूत करने की जरूरत है। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में बड़े पैमाने पर ईवी अपनाने के लिए ग्रिड क्षमता, नवीकरणीय ऊर्जा एकीकरण और मानकीकरण पर विशेष ध्यान देना होगा।
केंद्र सरकार का लक्ष्य आने वाले वर्षों में देशभर में इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग तेजी से बढ़ाना है। इस दिशा में कर्नाटक का प्रदर्शन अन्य राज्यों के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है। राज्य सरकार का कहना है कि अगले चरण में और अधिक फास्ट चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जाएंगे तथा छोटे शहरों और राजमार्गों पर नेटवर्क को मजबूत किया जाएगा।
कुल मिलाकर 6,805 चार्जिंग स्टेशनों का आंकड़ा केवल एक संख्या नहीं, बल्कि कर्नाटक में तेजी से बदलती परिवहन व्यवस्था का संकेत है। यदि यही रफ्तार बनी रहती है तो राज्य आने वाले वर्षों में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और हरित परिवहन के क्षेत्र में देश की अग्रणी भूमिका निभा सकता है।