UNESCO की रिपोर्ट: 2021 से अब तक 24 लाख अफगान लड़कियां स्कूल शिक्षा से वंचित

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संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन UNESCO ने एक नई रिपोर्ट में कहा है कि अगस्त 2021 में तालिबान के सत्ता में आने के बाद से लगभग 24 लाख अफगान लड़कियां माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक शिक्षा से बाहर हो चुकी हैं। रिपोर्ट के अनुसार यह दुनिया में लड़कियों की शिक्षा से जुड़ा सबसे गंभीर संकटों में से एक है और इसका असर आने वाली कई पीढ़ियों तक पड़ सकता है।

UNESCO ने कहा कि अफगानिस्तान में माध्यमिक स्तर से ऊपर की लड़कियों की शिक्षा पर लगाए गए प्रतिबंधों के कारण बड़ी संख्या में छात्राओं की पढ़ाई रुक गई है। संगठन के अनुसार यदि यह स्थिति जारी रही तो देश की सामाजिक और आर्थिक प्रगति पर गहरा नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

तालिबान ने 2021 में सत्ता संभालने के बाद शुरू में शिक्षा को लेकर कुछ आश्वासन दिए थे, लेकिन बाद में लड़कियों के स्कूलों और विश्वविद्यालयों पर क्रमिक प्रतिबंध लगाए गए। वर्तमान में अधिकांश किशोरियों को माध्यमिक विद्यालयों में जाने की अनुमति नहीं है और विश्वविद्यालयों में महिलाओं की शिक्षा भी गंभीर रूप से प्रभावित हुई है।

UNESCO की महानिदेशक ने कहा कि शिक्षा केवल व्यक्तिगत अधिकार नहीं, बल्कि समाज के विकास की बुनियादी शर्त है। संगठन ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अफगान लड़कियों की शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रयास तेज करने की अपील की है।

विशेषज्ञों का कहना है कि शिक्षा से वंचित होने का असर केवल स्कूल तक सीमित नहीं रहता। इससे महिलाओं की रोजगार संभावनाएं घटती हैं, स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता कम होती है और बाल विवाह तथा गरीबी का जोखिम बढ़ सकता है। लंबे समय तक शिक्षा बाधित रहने पर पूरे समाज की उत्पादक क्षमता प्रभावित होती है।

अफगान परिवारों में भी इस स्थिति को लेकर चिंता बढ़ी है। कई अभिभावकों का कहना है कि उनकी बेटियां पढ़ना चाहती हैं, लेकिन उन्हें स्कूल जाने की अनुमति नहीं मिल रही। कुछ परिवार निजी या अनौपचारिक शिक्षण व्यवस्था का सहारा लेने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन ऐसी सुविधाएं सीमित हैं।

मानवाधिकार संगठनों ने रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि लड़कियों की शिक्षा पर प्रतिबंध बुनियादी अधिकारों का गंभीर उल्लंघन है। उन्होंने तालिबान प्रशासन से तत्काल प्रतिबंध हटाने और सभी लड़कियों के लिए स्कूल तथा विश्वविद्यालय खोलने की मांग की है।

तालिबान प्रशासन का कहना रहा है कि वह शिक्षा व्यवस्था को अपनी नीतियों और सांस्कृतिक मानकों के अनुरूप पुनर्गठित कर रहा है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस तर्क से संतुष्ट नहीं है। कई देशों और संगठनों ने स्पष्ट किया है कि महिलाओं और लड़कियों की शिक्षा किसी भी आधुनिक समाज का अनिवार्य हिस्सा है।

अर्थशास्त्रियों का मानना है कि महिलाओं की शिक्षा पर प्रतिबंध अफगानिस्तान की अर्थव्यवस्था को भी नुकसान पहुंचा सकता है। कम शिक्षित महिला आबादी का अर्थ है कम कार्यबल भागीदारी, कम आय और सीमित आर्थिक विकास।

UNESCO ने चेतावनी दी है कि यदि वर्तमान नीतियों में बदलाव नहीं हुआ तो आने वाले वर्षों में शिक्षा से वंचित लड़कियों की संख्या और बढ़ सकती है। संगठन ने समुदाय आधारित शिक्षा कार्यक्रमों, दूरस्थ शिक्षा और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने की आवश्यकता बताई है।

अफगानिस्तान पहले ही लंबे संघर्ष, आर्थिक संकट और मानवीय चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे में शिक्षा व्यवस्था का कमजोर होना देश के भविष्य के लिए अतिरिक्त चिंता का विषय बन गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी समाज का पुनर्निर्माण शिक्षित युवाओं के बिना संभव नहीं होता।

फिलहाल UNESCO की यह रिपोर्ट अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक चर्चा का विषय बनी हुई है। शिक्षा अधिकार कार्यकर्ता इसे अफगान लड़कियों की स्थिति पर गंभीर चेतावनी मान रहे हैं और उम्मीद जता रहे हैं कि बढ़ता वैश्विक दबाव भविष्य में शिक्षा संबंधी प्रतिबंधों में बदलाव लाने में मदद कर सकता है।

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