एयर इंडिया पायलट मामले में नई रिपोर्ट सामने आई, फ्लाइट में तकनीकी अलर्ट और पायलट के टेस्ट को लेकर बढ़ी जांच

  • Reading time:2 mins read
  • Post comments:0 Comments
You are currently viewing एयर इंडिया पायलट मामले में नई रिपोर्ट सामने आई, फ्लाइट में तकनीकी अलर्ट और पायलट के टेस्ट को लेकर बढ़ी जांच

एयर इंडिया की फुकेत-दिल्ली फ्लाइट AI2379 से जुड़े मामले में अब नई जानकारी सामने आई है। 4 अगस्त 2026 को उड़ान के दौरान विमान अचानक करीब 300 से 360 फीट नीचे चला गया था, जिसके बाद यात्रियों और क्रू मेंबरों को चोटें आई थीं। घटना को गंभीर मानते हुए जांच शुरू की गई और अब सामने आई एक कथित पोस्ट-फ्लाइट मेंटेनेंस रिपोर्ट ने विमान में दर्ज कई तकनीकी चेतावनियों को लेकर नया सवाल खड़ा कर दिया है। इस बीच पायलट के ड्रग टेस्ट और उनकी उड़ान के दौरान कथित स्थिति की भी जांच हो रही है।

रिपोर्ट के मुताबिक, एयरबस A320 के सिस्टम लॉग में एक मिनट के भीतर कई चेतावनियां दर्ज हुई थीं। 9:32 बजे के आसपास विमान के तीनों हाइड्रोलिक सिस्टम से संबंधित कम दबाव और फ्लूड लेवल से जुड़े अलर्ट सामने आए। इसके अलावा एलिवेटर फ्लाइट कंट्रोल, ऑटोपायलट, इंजन एंटी-आइस और इमरजेंसी एग्जिट डोर से जुड़े संदेश भी रिकॉर्ड हुए। ऑटोपायलट के डिस्कनेक्ट होने की घटनाएं भी दर्ज की गईं।

सबसे अहम बात यह है कि उसी अवधि के आसपास विमान की ऊंचाई में अचानक बदलाव दर्ज हुआ। उपलब्ध फ्लाइट डेटा के अनुसार विमान करीब 36,160 फीट की ऊंचाई पर था और इसके बाद लगभग 35,800 फीट तक नीचे आया। शुरुआती तौर पर एयर इंडिया ने घटना को टर्बुलेंस से जुड़ा बताया था, लेकिन अब जांचकर्ता यह पता लगाने में जुटे हैं कि तकनीकी चेतावनियों और ऊंचाई में हुई गिरावट के बीच कोई सीधा संबंध था या नहीं। कथित मेंटेनेंस लॉग अपने आप यह साबित नहीं करता कि सभी चेतावनियां वास्तविक सिस्टम फेलियर के कारण ही आई थीं।

मामले का दूसरा संवेदनशील पहलू फ्लाइट के पायलट से जुड़ा है। जांच के दौरान पायलट ने कथित तौर पर बताया कि उन्होंने व्यक्तिगत परेशानियों के चलते नींद की दवा ली थी। नई रिपोर्टों के मुताबिक, उनका प्रारंभिक ड्रग टेस्ट “नॉन-नेगेटिव” आया था और इसके बाद किए गए पुष्टि परीक्षण में कैनाबिस के लिए पॉजिटिव परिणाम मिलने की बात सामने आई है। हालांकि, ये परिणाम सार्वजनिक आधिकारिक रिपोर्ट के रूप में जारी नहीं किए गए हैं और संबंधित जानकारी सूत्रों के हवाले से सामने आई है। इसलिए अंतिम जांच रिपोर्ट आने तक इसे अंतिम निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि पायलट ने जांचकर्ताओं को बताया कि वह उड़ान के दौरान करीब 30 से 35 मिनट तक सो गए थे। उनके अनुसार, बाद में वे वॉशरूम गए और वापस आकर पहले अधिकारी के पीछे खड़े थे। इसी दौरान विमान में ऊंचाई से जुड़ी घटना हुई और उन्हें कॉकपिट के फर्श तक गिरने की बात सामने आई। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

इस घटना में फर्स्ट ऑफिसर की भूमिका भी चर्चा में है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार घटना के समय फर्स्ट ऑफिसर विमान चला रहे थे, जबकि कमांडर मॉनिटरिंग भूमिका में थे। घटना के बाद विमान को सुरक्षित तरीके से दिल्ली में उतारा गया। सरकारी अधिकारियों ने भी फर्स्ट ऑफिसर के प्रयासों की सराहना की है और कहा है कि मामले की जांच से विमानन सुरक्षा प्रक्रियाओं में बदलाव की जरूरत सामने आ सकती है।

सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए एयर इंडिया से सुरक्षा और ऑपरेशनल निगरानी को और मजबूत करने को कहा है। साथ ही DGCA को विमानन कर्मचारियों के ड्रग टेस्टिंग नियमों की समीक्षा करने का निर्देश दिया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, अनिवार्य टेस्टिंग का दायरा बढ़ाने और प्रतिबंधित नशीले पदार्थों के लिए पॉजिटिव पाए जाने पर सख्त कार्रवाई करने की तैयारी है। वहीं डॉक्टर द्वारा निर्धारित दवाओं के कारण पॉजिटिव परिणाम आने वाले मामलों के लिए अलग प्रक्रिया पर भी विचार किया जा रहा है।

तकनीकी पक्ष की जांच में एयरबस की टीम और फ्रांसीसी विमानन नियामक के अधिकारियों के शामिल होने की भी जानकारी सामने आई है। Aircraft Accident Investigation Bureau यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि दर्ज चेतावनियां वास्तविक तकनीकी खराबी थीं या किसी अस्थायी घटना के कारण सिस्टम ने एक साथ कई अलर्ट दिए।

फिलहाल एयर इंडिया के इस मामले में कई सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही मिल पाएंगे। क्या ऊंचाई में अचानक कमी का कारण तकनीकी समस्या थी, मौसम संबंधी घटना थी या दोनों का कोई संयोजन था? पायलट की दवा और टेस्ट रिपोर्ट का उड़ान पर कोई असर पड़ा या नहीं? इन सभी पहलुओं की जांच जारी है। इसलिए किसी एक कारण को दुर्घटना या घटना की अंतिम वजह मानना अभी जल्दबाजी होगी।

यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब एयर इंडिया से जुड़ी सुरक्षा पर पहले से ही कड़ी निगाह है। ऐसे में AI2379 की जांच के निष्कर्ष न केवल इस एक फ्लाइट के लिए, बल्कि एयरलाइन और पूरे भारतीय एविएशन सेक्टर की सुरक्षा प्रक्रियाओं के लिए भी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। आने वाली आधिकारिक रिपोर्ट से ही इस पूरे घटनाक्रम की वास्तविक तस्वीर साफ होगी।

Leave a Reply