मध्य प्रदेश विधानसभा में ध्वनिमत से यूसीसी विधेयक पारित, कांग्रेस के विरोध के बीच सदन में हंगामा

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मध्य प्रदेश विधानसभा में समान नागरिक संहिता (यूनिफॉर्म सिविल कोड-यूसीसी) से संबंधित विधेयक को ध्वनिमत (वॉइस वोट) के जरिए पारित कर दिया गया। इस दौरान सदन का माहौल काफी गरम रहा और कांग्रेस विधायकों ने सरकार के फैसले का जोरदार विरोध किया। विपक्ष ने विधेयक पर विस्तृत चर्चा और मतदान की मांग की, जबकि सरकार ने इसे राज्य के लिए एक ऐतिहासिक और सुधारात्मक कदम बताया।

विधानसभा की कार्यवाही शुरू होते ही यूसीसी विधेयक को चर्चा के लिए पेश किया गया। सरकार की ओर से कहा गया कि इस कानून का उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए समान कानूनी व्यवस्था लागू करना और सामाजिक न्याय को मजबूत करना है। सरकार का दावा है कि इससे व्यक्तिगत कानूनों में मौजूद असमानताओं को दूर करने में मदद मिलेगी और महिलाओं तथा बच्चों के अधिकारों को अधिक मजबूती मिलेगी।

जैसे ही विधेयक पर चर्चा शुरू हुई, कांग्रेस विधायकों ने कई बिंदुओं पर आपत्ति जताई। विपक्ष का कहना था कि इतना महत्वपूर्ण कानून बिना व्यापक जनपरामर्श और सभी पक्षों की राय लिए नहीं लाया जाना चाहिए। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार इस संवेदनशील विषय पर पर्याप्त बहस से बच रही है और जल्दबाजी में विधेयक पारित करना चाहती है।

विरोध के दौरान कांग्रेस विधायक अपनी सीटों से उठकर नारेबाजी करने लगे। कुछ विधायक वेल में भी पहुंच गए और सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। विपक्ष ने विधेयक को चयन समिति के पास भेजने की मांग की ताकि विभिन्न सामाजिक, धार्मिक और कानूनी विशेषज्ञों की राय ली जा सके। हालांकि सरकार अपने रुख पर कायम रही।

हंगामे के बीच विधानसभा अध्यक्ष ने सदन की व्यवस्था बनाए रखने की अपील की। जब विरोध जारी रहा तो सरकार ने ध्वनिमत से विधेयक पारित कराने का प्रस्ताव रखा। अध्यक्ष ने सदन में मौजूद सदस्यों की आवाज के आधार पर विधेयक को पारित घोषित कर दिया। इसके बाद कांग्रेस विधायकों ने सरकार पर लोकतांत्रिक प्रक्रिया की अनदेखी करने का आरोप लगाया और सदन से विरोध जताते हुए बाहर निकल गए।

मुख्यमंत्री और सरकार के अन्य मंत्रियों ने विधेयक पारित होने का स्वागत किया। उनका कहना था कि यह कदम संविधान की भावना के अनुरूप है और समाज में समानता तथा न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित होगा। सरकार ने यह भी कहा कि कानून किसी धर्म विशेष के खिलाफ नहीं है, बल्कि सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार और समान जिम्मेदारियां सुनिश्चित करने का प्रयास है।

दूसरी ओर कांग्रेस ने कहा कि यूसीसी जैसे विषय पर राजनीतिक सहमति बनाना जरूरी था। विपक्ष का आरोप है कि सरकार ने संवाद की बजाय बहुमत के आधार पर निर्णय लिया। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि वे इस मुद्दे को जनता के बीच लेकर जाएंगे और लोकतांत्रिक तरीके से अपना विरोध जारी रखेंगे।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यूसीसी का मुद्दा लंबे समय से राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय रहा है। ऐसे में मध्य प्रदेश विधानसभा में इस विधेयक का पारित होना आने वाले समय में राजनीतिक और कानूनी बहस को और तेज कर सकता है। इस फैसले का असर राज्य की राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति पर भी देखने को मिल सकता है।

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यदि विधेयक आगे की सभी संवैधानिक प्रक्रियाओं को पूरा करता है, तो इसके प्रभाव और क्रियान्वयन को लेकर विस्तृत नियम बनाए जाएंगे। साथ ही, इससे जुड़े विभिन्न प्रावधानों की न्यायिक समीक्षा की संभावना भी बनी रह सकती है।

फिलहाल विधानसभा में यूसीसी विधेयक के पारित होने के बाद सत्ता पक्ष इसे अपनी बड़ी उपलब्धि बता रहा है, जबकि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ उठाया गया कदम मान रहे हैं। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और सार्वजनिक बहस और तेज होने की संभावना है।

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