भारतीय शेयर बाजार में हाल के दिनों में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली का असर साफ तौर पर देखने को मिल रहा है। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उतार-चढ़ाव और डॉलर की मजबूती जैसे कारणों से विदेशी निवेशक उभरते बाजारों से पैसा निकालकर सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं। इसका सीधा दबाव भारतीय बाजारों पर पड़ा है, लेकिन इसके बावजूद घरेलू निवेशकों की मजबूत भागीदारी ने बाजार को बड़ी गिरावट से बचाए रखा है।
विश्लेषकों के अनुसार, पिछले कुछ हफ्तों में विदेशी निवेशकों ने भारतीय इक्विटी बाजार से अरबों रुपये की निकासी की है। इस बिकवाली का सबसे ज्यादा असर बैंकिंग, आईटी और मेटल सेक्टर के शेयरों पर देखा गया है। जब विदेशी निवेशक बड़े पैमाने पर बिकवाली करते हैं, तो बाजार में अस्थिरता बढ़ जाती है और इंडेक्स पर दबाव बनता है। यही कारण है कि प्रमुख सूचकांक कभी-कभी दबाव में दिखाई दे रहे हैं।

हालांकि, इस नकारात्मक माहौल के बीच एक सकारात्मक पहलू भी सामने आया है—घरेलू संस्थागत निवेशक (DII) और रिटेल निवेशकों की मजबूत खरीदारी। म्यूचुअल फंड्स, बीमा कंपनियों और खुदरा निवेशकों ने लगातार बाजार में पैसा लगाया है, जिससे विदेशी बिकवाली के प्रभाव को काफी हद तक संतुलित किया जा सका है। यही वजह है कि बाजार में भारी गिरावट के बजाय सीमित उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत बुनियाद भी बाजार को सहारा दे रही है। देश की जीडीपी वृद्धि दर, स्थिर मुद्रास्फीति और मजबूत कॉरपोरेट अर्निंग्स निवेशकों के भरोसे को बनाए हुए हैं। इसके अलावा, सरकार की इंफ्रास्ट्रक्चर विकास योजनाएं और डिजिटल अर्थव्यवस्था में विस्तार भी दीर्घकालिक निवेश आकर्षित कर रहे हैं।
वैश्विक स्तर पर चल रही अनिश्चितताओं ने विदेशी निवेशकों को सतर्क कर दिया है। अमेरिका में ब्याज दरों की दिशा, यूरोप में आर्थिक सुस्ती और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जैसे कारक उभरते बाजारों के लिए चुनौती बने हुए हैं। ऐसे माहौल में विदेशी निवेशक अक्सर जोखिम कम करने के लिए उभरते बाजारों से पूंजी निकालते हैं, जिसका असर भारत जैसे देशों पर भी पड़ता है।
बाजार विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि यह स्थिति अस्थायी हो सकती है। जैसे ही वैश्विक परिस्थितियां स्थिर होंगी और ब्याज दरों में नरमी आएगी, विदेशी निवेशक फिर से भारतीय बाजार की ओर रुख कर सकते हैं। भारत की मजबूत आर्थिक ग्रोथ और बढ़ता उपभोक्ता आधार इसे लंबे समय के लिए आकर्षक निवेश गंतव्य बनाते हैं।