Sugar Stocks Crash: ड्यूटी-फ्री चीनी इंपोर्ट की मंजूरी से शुगर शेयरों में भारी गिरावट, Balrampur Chini भी धड़ाम

  • Reading time:1 mins read
  • Post comments:0 Comments
You are currently viewing Sugar Stocks Crash: ड्यूटी-फ्री चीनी इंपोर्ट की मंजूरी से शुगर शेयरों में भारी गिरावट, Balrampur Chini भी धड़ाम

भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार, 21 अगस्त 2026 को चीनी कंपनियों के शेयरों में अचानक तेज बिकवाली देखने को मिली। केंद्र सरकार के 10 लाख टन यानी 1 मिलियन मीट्रिक टन कच्ची चीनी के ड्यूटी-फ्री आयात की अनुमति देने के बाद निवेशकों का भरोसा शुगर स्टॉक्स से कुछ समय के लिए कमजोर पड़ गया। सरकार का यह फैसला घरेलू बाजार में बढ़ती चीनी कीमतों को नियंत्रित करने और आगामी त्योहारी सीजन से पहले पर्याप्त सप्लाई सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया गया है।

शुक्रवार के शुरुआती कारोबार में कई प्रमुख चीनी कंपनियों के शेयरों में 3 से 7 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई। Dwarikesh Sugar Industries करीब 7.2 फीसदी तक टूट गया और यह इस समूह का सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाला शेयर रहा। Dalmia Bharat Sugar में भी करीब 6.4 फीसदी की गिरावट आई। वहीं Balrampur Chini Mills का शेयर शुरुआती कारोबार में 5 फीसदी से ज्यादा नीचे चला गया। Uttam Sugar, EID Parry और Dhampur Sugar Mills जैसे शेयर भी दबाव में रहे।

निवेशकों की चिंता का मुख्य कारण यह है कि विदेश से ड्यूटी-फ्री कच्ची चीनी आने के बाद घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ सकती है। ज्यादा सप्लाई का सीधा असर चीनी की कीमतों पर पड़ सकता है। पिछले कुछ समय में घरेलू चीनी कीमतों में काफी तेजी आई थी, जिससे चीनी मिलों को अपनी मौजूदा इन्वेंट्री पर बेहतर बिक्री भाव मिलने की उम्मीद बनी थी। अब सरकार के इस कदम से बाजार को लग रहा है कि कीमतों में तेजी पर रोक लग सकती है।

सरकार ने कच्ची चीनी के 10 लाख टन आयात की अनुमति 31 अक्टूबर 2026 तक दी है। सामान्य तौर पर भारत कच्ची चीनी के आयात पर करीब 100 फीसदी शुल्क लगाता है। इस बार शुल्क हटाने का फैसला ऐसे समय में आया है जब देश में चीनी की कीमतें रिकॉर्ड स्तर के आसपास पहुंच गई हैं। सरकार का उद्देश्य आम लोगों और खाद्य उद्योग पर बढ़ती कीमतों का दबाव कम करना है।

इस फैसले का असर इसलिए भी ज्यादा दिखाई दे रहा है क्योंकि आने वाले महीनों में देश में त्योहारी मांग बढ़ने वाली है। अगस्त से नवंबर के बीच गणेश चतुर्थी, दशहरा और दिवाली जैसे त्योहार आते हैं। इस दौरान मिठाई, बिस्कुट और अन्य खाद्य उत्पादों में चीनी की खपत बढ़ जाती है। इसी वजह से सरकार पहले से बाजार में पर्याप्त स्टॉक बनाए रखना चाहती है।

चीनी कंपनियों के लिए मौजूदा स्थिति थोड़ी चुनौतीपूर्ण बन गई है। एक तरफ महंगी चीनी से मिलों को बेहतर रियलाइजेशन मिल रहा था, वहीं दूसरी तरफ सरकार का हस्तक्षेप कीमतों में नरमी ला सकता है। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर घरेलू चीनी कीमतें नीचे आती हैं तो कंपनियों के मार्जिन और भविष्य की कमाई को लेकर निवेशकों की उम्मीदों पर असर पड़ सकता है। यही वजह है कि सरकारी घोषणा के तुरंत बाद शुगर स्टॉक्स में मुनाफावसूली और बिकवाली देखने को मिली।

हालांकि, इस गिरावट को केवल कंपनियों की कमजोरी के रूप में देखना सही नहीं होगा। शुगर कंपनियों के शेयरों में पिछले दिनों तेजी भी देखने को मिली थी, क्योंकि घरेलू बाजार में कीमतें बढ़ रही थीं और सप्लाई को लेकर चिंता बनी हुई थी। 20 अगस्त को ही कई चीनी शेयरों में तेजी आई थी। इसके अगले दिन सरकारी नीति में बदलाव की खबर आने से निवेशकों ने तेजी से अपनी पोजीशन हल्की कर दी।

Balrampur Chini Mills भी इसी दबाव का हिस्सा रहा। शेयर एक समय करीब 5.28 फीसदी गिरकर ₹726.05 के स्तर तक पहुंच गया था, हालांकि बाद में गिरावट कुछ कम हुई। इसका मतलब यह है कि बाजार में फिलहाल इस शेयर को लेकर पूरी तरह नकारात्मक माहौल नहीं है, लेकिन सरकार की नई आयात नीति ने शॉर्ट टर्म में निवेशकों की चिंता जरूर बढ़ा दी है।

कुल मिलाकर, ड्यूटी-फ्री चीनी आयात का फैसला सरकार के लिए कीमतों और सप्लाई को नियंत्रित करने की कोशिश है, लेकिन चीनी कंपनियों के शेयरों के लिए यह खबर फिलहाल नकारात्मक साबित हुई है। आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर घरेलू चीनी कीमतों, आयात की वास्तविक मात्रा, त्योहारी मांग और सरकार के अगले फैसलों पर रहेगी। शुगर स्टॉक्स में आगे भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है, इसलिए निवेशकों के लिए केवल एक दिन की गिरावट देखकर कोई फैसला लेने के बजाय कंपनी के फंडामेंटल और पूरे सेक्टर की स्थिति को देखना जरूरी होगा।

Leave a Reply